हरियाणा में 30 हजार एकड़ पंचायती जमीन पर अवैध कब्जे

चण्डीगढ :- हरियाणा में एक बार फिर गाँवों की पंचायती, शामलाती जमीन व जोहड़ों पर किए गए अवैध कब्जों का मामला सुर्खियों में है। वजह है गाँवों में अवैध कब्जों को लेकर माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के तल्ख आदेश। प्रदेश में शायद ही कोई ऐसा गाँव होगा जहाँ पंचायती जमीन पर अवैध कब्जे न किए गए हों।

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करीब दो साल पूर्व वर्ष 2018 में हाईकोर्ट में पेश की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा के गाँवों में करीब 30 हजार एकड़ पंचायती व शामलाती जमीन पर अवैध कब्जे किए गए हैं। उस समय जस्टिस आरके जैन एवं जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने अपने आदेश में साफ-साफ कहा था कि हमेंं पता है कि गाँवों से कब्जे राजनीतिक शय के कारण नहीं हटाए जा रहे।

अपने आदेश में हाईकोर्ट ने ऐसे लोगों के नाम भी मांगे थे जो प्रदेशभर में शामलात भूमि पर अवैध कब्जे करवा रहे हैं ताकि ऐसे लोगों को कानून का पाठ पढ़ाया जा सके। लेकिन प्रदेश सरकार की तरफ से हाईकोर्ट के आदेशों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। माननीय हाईकोर्ट ने अब एक बार फिर गाँवों में पंचायती जमीनों पर किए गए अवैध कब्जों को छुड़वाने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आगामी तीन माह में ग्राम पंचायतों में पंचायती, शामलात, सांझे की जमीनों व जोहड़ों पर किए गए अवैध कब्जों को लेकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू करने के साथ-साथ अवैध कब्जाधारियों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए हैं।

दिए आदेशों में हाईकोर्ट ने साफ किया है कि पंचायती जमीनों से कब्जे हटवाकर कब्जाधारकों पर केस दर्ज किए जाएं व छुड़वाई गई जमीन पंचायतों को सौंपी जाए। हाईकोर्ट के आदेशों से प्रदेश सरकार के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारियों के भी हाथ-पांव फूल गए हैं क्योंकि गाँवों की पंचायती जमीन से अवैध कब्जे छुड़वाना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। अधिकतर कब्जाधारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।

यदि इन कब्जाधारियों की कुंडली खंगाली जाए तो ज्यादातर कब्जाधारी राजनेताओं या वरिष्ठ अधिकारियों के करीबी मिलेंगे।हाईकोर्ट के नोटिस पर हरियाणा के मुख्य सचिव ने स्टेटस रिपोर्ट दायर कर बताया है कि इस बाबत सभी जिला उपायुक्तों को लैटर जारी कर अवैध कब्जे करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दे दिये गए हैं।

बता दें कि इससे पहले लोकायुक्त कोर्ट ने उन सरपंचों, पंचों और ग्राम सचिवों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के लिए कहा था जिनकी मिलीभगत से कब्जे हो रहे हैं। लेकिन लोकायुक्त के फैसले पर भी सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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